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Monday, January 30, 2023
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अब सिंगल सुपर फास्फेट के उपयोग से होगी अधिक मात्रा में पैदावार, बस इस तरीके को फॉलो करे

Kheti Kisani News: अब सिंगल सुपर फास्फेट के उपयोग से होगी अधिक मात्रा में पैदावार, बस इस तरीके को फॉलो करे, फसलों के अधिक और उत्पादन के लिए किसानों को सिंगल सुपर फॉस्फेट के उपयोग पर जोर देना चाहिए। ये फसलों के बेहतर उत्पादन में मदद करता है। कृषि विशेषज्ञ भी इसके इस्तेमाल की सिफारिश करते हैं। अब प्रश्न यह उठता है कि इसका इस्तेमाल किस तरह और कितनी मात्रा में किया जाए ताकि फसलों के बेहतर उत्पादन के साथ ही भूमि की उर्वरक क्षमता भी बनी रहे।

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इन बातो का हमेशा ध्यान रखे

किसी भी उर्वरक का प्रयोग करने से पूर्व मिट्टी जांच अवश्य करा लेनी चाहिए ताकि ये पता लगाया जा सके कि भूमि में किस पोषक तत्व की कमी है। इससे किसानों को खाद व उर्वरक का प्रयोग करने में आसानी होगी और भूमि की सेहत भी सुधरी रहेगी। आज हम ट्रैक्टर जंक्शन की इस पोस्ट में आपको फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए सिंगल सुपर फास्फेट के उपयोग की जानकारी दे रहे हैं ताकि आप इसका सही तरीके से इस्तेमाल करके अपनी पैदावार बढ़ा सके।

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जानिए सिंगल सुपर फास्फेट के बारे में

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सिंगल सुपर फास्फेट एक फास्फोरस उर्वरक है। इसमें 16 प्रतिशत मात्रा में फास्फोरस होता है और 11 प्रतिशत सल्फर होता है। इसमें मौजूद सल्फर के कारण ये तिलहनी एवं दलहनी फसलों के लिए अन्य उर्वरक तुलना में अधिक लाभकारी पाया गया है। तिलहन फसलों में इसका उपयोग के काफी अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इसके प्रयोग से तिलहन फसलों में तेल की मात्रा बढ़ती है विशेषकर सरसों में। वहीं इसके प्रयोग से दलहनी फसलों में प्रोटीन की मात्रा में वृद्धि होती है। 

अब सिंगल सुपर फास्फेट के उपयोग से होगी अधिक मात्रा में पैदावार, बस इस तरीके को फॉलो करे

मिट्टी में कई प्रकार के पोषक तत्व होते हैं जो फसल की बेहतर पैदावार प्राप्त करने मेें सहायक होते है। लेकिन कई कारणों से मिट्टी के पोषक तत्वों में कमी हो जाती है। इसे पूरा करने के लिए जैविक और रासायनिक खाद व उर्वरकों का इस्तेमाल किया जाता है। मिट्टी के कुछ पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग किया जाता है। सिंगल सुपर फास्फेट में 16 प्रतिशत फॉस्फोरस की मात्रा होती है। वहीं 11 प्रतिशत सल्फर की मात्रा होती है। इसके अलावा 19 प्रतिशत कैल्शियम और एक प्रतिशत जिंक की मात्रा होती है। इसमें से सल्फर की मात्रा इसमें अच्छी होने से ये फसलों की पैदावार बढ़ाने में किसानों की मदद कर सकता है। 

डीएपी की जगह सिंगल सुपर फास्फेट का इस्तेमाल कर सकते है अधिक पैदावार

फसलों की बुवाई के साथ ही अक्सर बाजारों में उर्वरकों की मांग अधिक बढ़ जाती है। इसके कारण बाजार में उर्वरक की किल्लत देखने को मिलती है। खास कर डीएपी की कमी बाजार में देखने को मिलती है। ऐसे किसान डीएपी की जगह सिंगल सुपर फास्फेट का इस्तेमाल करके बेहतर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ये दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए काफी अच्छा है। इसे डीएपी की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है। डीएपी की तुलना में सिंगल सुपर फास्फेट बाजार में किफायती दाम में मिल जाता है। ये आसानी से बाजार में मिल जाता है।

इस तरह से करना होगा उपयोग

किसान अधिक लाभ लेने के लिए यूरिया के साथ एसएसपी का इस्तेमाल कर सकते हैं। जो लाभ डीएपी +सल्फर को इस्तेमाल करने पर होता है वहीं लाभ किसानों को सिंगल सुपर फास्फोरस (एसएसपी) का इस्तेमाल यूरिया के साथ करने पर प्राप्त हो सकता है। किसान अपनी इच्छानुसार डीएपी+सल्फर और एसएसपी+यूरिया में से किसी एक का इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि आप डीएपी+सल्फर की जगह एसएसपी का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको तीन बोरी एसएसपी और एक बोरी यूरिया का उपयोग करना चाहिए।  

देखे इसके ताजा रेट

किसानों को उर्वरकों पर सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी के बाद किसानों को सस्ती दर पर खाद व उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। सब्सिडी के बाद उर्वरकों का जो मूल्य सरकार की ओर से निर्धारित किया गया है वे इस प्रकार से है:-

  • यूरिया-266.50 रुपए प्रति बैग (45 किलोग्राम) 
  • डीएपी-1,350 रुपए प्रति बैग (50 किलोग्राम) 
  • एनपीके- 1,470 रुपए प्रति बैग (50 किलोग्राम) 
  • एमओपी-1,700 रुपए प्रति बैग (50 किलोग्राम)
  • सिंगल सुपर फास्फेट – एक बोरी 425 रुपए (50 किलोग्राम) 
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