अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा समारोह में, 8 दिनों तक पूजा के दौरान, 11 दंपत्तियों को इन नियमों का सख्ती से करना होगा पालन

Pragya
3 Min Read

राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी होने वाली है। लेकिन इस प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में यजमान की भूमिका निभाने वाले दंपत्तियों को 15 जनवरी से ही कठोर नियमों का पालन करना जरुरी होगा। काशी के विद्वान पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरी को पत्र भीजवाया है। जिसमें प्राण प्रतिष्ठा से पहले यजमानों के लिए कुछ नियमों का पालन करने के बारे बारे में लिखा गया है। पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने यजमानों को 15 जनवरी से 22 जनवरी तक 45 नियमों का पालन करने की जानकारी दी है।

पूजा में 11 यजमान होंगे शामिल

image 621

यह भी पढ़े –राम मंदिर के ध्वज पर कोविदार वृक्ष को किया जायेगा अंकित, जाने इसका क्या है महत्त्व

ट्रस्ट के एक पदाधिकारी से सुचना मिली है। कि 15 जनवरी से शुरू होने वाली पूजा में 11 दंपत्ति यजमान की भूमिका में हीओने वाली है। पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ के अनुसार, 8 दिनों तक पूजा के दौरान सभी 11 दंपत्तियों को इन नियमों का सही तरीके के पालन करने को कहा गया है।

इस तरह से करना होगा नियमों का पालन

  • इस दौरान बाहरी भोजन व धूम्रपान का त्याग करना होगा।
  • क्रोध, अहंकार के अलावा मदिरा सेवन से खुद को दूर रखना होगा।
  • मन को विचलित करने के दृश्यों से दूर रहना होगा।
    ब्राह्मणों को आदर देना होगा।
  • सच बोलने के व्रत में बाधा आने पर मौन रहना होगा।
  • 8 दिनों तक कोई भी यजमान सूती वस्त्र नहीं पहन सकेंगे।
  • किसी से झगड़ा, कठोर वचन व कटु बोल नहीं बिले जायेगे।
  • यजमान को सदविचारों व सद्चिन्तन से युक्त होना पड़ेगा।
  • पुरुष यजमान सिला हुआ सूती वस्त्र नहीं पहन सकते है।
  • पत्नियां लहंगा, चोली जैसे सिले हुए वस्त्र पहन सकती है।
  • स्वेटर, ऊनी, शॉल, कंबल धारण कर सकते है।

भोजन के लिए करे इन नियमों का पालन

image 625

यह भी पढ़े –सुबह उठकर खाली पेट भिगोए हुए चने खाने से होगी बहुत सी समस्याएं दूर, देखें इसके अनोखे फायदे

  • 8 दिनों तक होने वाले पूजा से पहले सिर्फ फलाहार करना होगा।
  • गरम व शीतल शुद्ध जल ग्रहण कर सकते हैं।
  • नित्य पूजन के बाद भी दिन में फलाहार कर करते है।
  • रात में आरती के बाद सात्विक भोजन, सेंधा नमक का उपयोग करना होगा।
  • खाने में हल्दी, राई, सरसों, उड़द, मूली, बैंगन, लहसुन, प्याज, मदिरा, मांस, अंडा, तेल से बना पदार्थ, गुड़, भुजिया चावल, चना वर्जित है।
  • खाने पीने की चीजें भगवान को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण कर।
  • दोपहर में ब्राह्मणों को पहले भोजन करा कर यजमान को भोजन करना होगा।
  • 8 दिनों तक तक यजमानों को खटिया पर बैठना या सोना वर्जित है।
  • रोज दाढ़ी व नाखून काटना भी वर्जित है।
Share This Article