भगवान श्री राम जा रहे थे वनवास तो केवट ने नदी पार करने से क्यों किया मना, क्या थी वह शर्त

Pragya
4 Min Read

भगवान राम के जीवन से जुड़ी कई कथाएं तो आपने भी सुनी ही होगी। उसी एक कथा ये भी शामिल हैं कि जब राजा दशरथ की सबसे प्रिय रानी कैकई के वरदान मांगने के बाद भगवान श्री राम माता सीता और लक्ष्मण तीनों वनवास पर छाले गए। तब वन जाते समय उन्हें रास्ते में सरयू नदी मिली और उसे पार करने के लिए एक नाव वाले की शर्त माननी पड़ी थी। शर्त पूरी होने के बाद ही नाव वाले ने भगवान राम को नदी पर करवाई थी।

जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास पर जा रहे थे। तो रास्ते में उन्हें सरयू नदी मिली थी. नदी के पास पहुंचने पर जब प्रभु ने नाव वाले से नदी पार कराने के लिए बोले तो नाव वाले का नाम केवट हो था। तो केवट ने कहा प्रभु मैंने सुना है कि आपके पैरों में कोई जादू है। आप के पैर जिस शिला यानि पत्थर को छू लेते हैं वो शिला इंसान का रोप बन जाती है। और जिस इंसान को छू देते हैं वह पत्थर का रूप ले लेती है।

जब श्रीराम ने केवट से नदी पार कराने की बात कही तो केवट ने उनके सामने एक शर्त राखी। कि मैं आपको नदी तब पार कराऊंगा. जब आप मुझे नाव में चढ़ने से पहले अपने चरण को धोने देंगे। इसी के बाद में मैं आपको नाव पर बैठाऊंगा। और नदी भी पार करा दुगा। जिसके लिए पहले तो भगवान राम हंसते हैं और बाद में फिर केवट की शर्त को मन लेते है।

image 739

यह भी पढ़े –केंद्रीय सहकारिता मंत्री का बड़ा ऐलान, दिसंबर 2027 के बाद एक किलो भी दाल आयात नहीं करेगा भारत

केवट ने प्रभु राम से शर्त क्यों राखी

केवट ने प्रभु श्रीराम से ऐसा इसलिए कहा था क्योंकि भगवान श्री राम के छूने से एक शिला स्त्री बन जाती है। जबकि वह स्त्री कोई और अहिल्या थी. जिसे भगवान इंद्र की धोखे की वजह से गौतम ऋषि ने पत्थर बनने का श्राप दे दिया था। जिसकी वजह से अहिल्या पत्थर बन गयी थी। अहिल्या का उद्धार करने के लिए ही भगवान श्रीराम ने ऐसा किया था। जब प्रभु श्री राम के पास केवट को देने के लिए कुछ नहीं था तब माता ने उतराई के तौर पर केवट को अपनी अंगूठी उतारकर दे दी।

केवट ने राम के पैर धोये

image 740

यह भी पढ़े –हिंदू पंचांग के अनुसार, कब है साल की पहली मासिक शिवरात्रि, इसकी पूजा का शुभ मुहूर्त देखें

भगवान श्री राम मुस्कुराते केवट से कहा कि केवट आओ और मेरे पैर धो लो। इतना सुनकर केवट की खुशी से झूम उठा। वह दौड़कर पैर धोने के लिए एक छोटी सी थाल ले आता है। और इसके बाद भगवान श्री राम का पैर को धोता है। वहीं दूसरा पैर जब मिट्टी में लिपट जाता है. तब केवट दुखी हो जाता है. केवट का ये दुख देखकर प्रभु श्री राम एक पैर पर ही खड़े हो जाते है। एक पैर पर भगवान श्री राम को खड़े होने पर परेशान केवट बोलता है। कि मेरे प्रभु कब तक आप ऐसे ही एक पैर पर खड़े रहोगे। आप मेरे सिर का सहारा ले लो। केवट की ये बात सुनकर भगवान राम ने केवट के सिर पर हाथ रख दिया। जिसके बाद आसमान से पुष्प की बारिश होने लगी। भगवान राम के चरण धोने के बाद केवट ने चरणामृत अपने परिजनों को पिलाया और भगवान श्री राम को नदी के उस पर ले गए।

Share This Article