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Wednesday, February 8, 2023
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भारत की ग्रोथ पर दिखने लगा मंदी से आमदनी घटने व गरीबी बढ़ने का अंदेशा,जाने क्या है खबर

जिस ब्रिटिश साम्राज्य का सूरज कभी अस्त नहीं होता था, उसकी मौजूदा हकीकत यही है। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने कहा है कि दिसंबर तिमाही में देश मंदी में प्रवेश कर जाएगा। उसने 2025 तक निगेटिव ग्रोथ रेट यानी मंदी का अंदेशा जताया है। सिर्फ इंग्लैंड नहीं, यूरोप के अनेक देशों की अर्थव्यवस्था खस्ताहाल होती जा रही है। पहले कोरोना संकट, फिर रूस-यूक्रेन युद्ध और अब इन दोनों के कारण रिकॉर्डतोड़ महंगाई ने दुनिया को एक बार फिर मंदी के मुहाने पर ला दिया है। क्या दुनिया डेढ़ दशक में तीसरी बार मंदी की ओर बढ़ रही है? आज के इंग्लैंड का हाल इस सवाल का जवाब है। डेनमार्क के इन्वेस्टमेंट बैंक, सैक्सो बैंक के विश्लेषक क्रिस्टोफर डेम्बिक ने अगस्त के दूसरे हफ्ते में कहा था कि इंग्लैंड की हालत काफी हद तक विकासशील देश जैसी हो गई है। डेम्बिक के अनुसार, “सिर्फ एक पैमाना बचा है जो इंग्लैंड को विकासशील देशों में शुमार करने से रोकता है, और वह है उसकी करेंसी पौंड। डांवाडोल आर्थिक हालत के बावजूद पौंड मजबूत बना हुआ है।” लेकिन पिछले सोमवार को वह पैमाना भी टूट गया और डॉलर की तुलना में पौंड रिकॉर्ड निचले स्तर पर चला गया। डेम्बिक का कोई नया बयान तो नहीं आया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय निवेशक कभी सुरक्षित समझे जाने वाले ब्रिटिश पौंड को बेचकर अमेरिकी डॉलर खरीद रहे हैं।

बेरोजगारी और सामाजिक अशांति बढ़ सकती है।”

2008-09 के वित्तीय संकट के बाद कहा गया था कि जीवन में ऐसा संकट एक बार ही आता है। लेकिन उसके बाद कोरोना लॉकडाउन और अब युद्ध से उपजा आर्थिक संकट… ऐसा पहली बार हुआ है। इसलिए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने बुधवार को जारी ‘चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक’ की शुरुआत इन पंक्तियों से की, “नई पीढ़ी पहली बार इतनी अधिक महंगाई देख रही है। इस पर नियंत्रण के लिए अमेरिका समेत अनेक देश ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं, जिससे ग्लोबल ग्रोथ के लिए खतरा पैदा हो गया है। लोगों की वास्तविक आमदनी और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस लगातार घट रहा है। ऐसे में बेरोजगारी और सामाजिक अशांति बढ़ सकती है।” ज्यादातर विशेषज्ञ मंदी की आशंका को सही मानते हैं। नेड डेविस रिसर्च (NDR) के अनुसार केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर बढ़ाने और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अगले साल मंदी की आशंका 98.1% है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने दुनिया के बड़े 49 संस्थानों के मुख्य अर्थशास्त्रियों का सर्वे किया, जिसमें सिर्फ 14% ने कहा कि मंदी का जोखिम नहीं है। 9% ने इसकी आशंका बहुत अधिक और 64% ने अधिक बताई। अमेरिका के लिए 70% और यूरोप के लिए 80% अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगले एक साल के दौरान ब्याज दरें बढ़ेंगी, इसलिए वहां मंदी की आशंका ज्यादा है।

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17 मार्च से 21 सितंबर तक पांच बार में ब्याज 3% बढ़ा चुका है।

दरअसल, अमेरिका और यूरोप रिकॉर्ड महंगाई से जूझ रहे हैं। अमेरिका में खुदरा महंगाई इस साल जनवरी से लगातार 7.5% के ऊपर बनी हुई है। जून में यह 9.1% पर पहुंच गई जो 1981 के बाद सबसे अधिक है। अगस्त में यह 8.3% रही। यूरोजोन में भी अगस्त में महंगाई रिकॉर्ड 9.1% पर पहुंच गई। इसे नीचे लाने के लिए अमेरिका का फेडरल रिजर्व 17 मार्च से 21 सितंबर तक पांच बार में ब्याज 3% बढ़ा चुका है। आखिरी तीन बार में तो उसने हर बार 0.75% की वृद्धि की। यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने 19 देशों के ब्लॉक यूरो जोन के लिए ब्याज दर पिछले महीने 0.75% बढ़ाई है। इससे पहले जुलाई में 0.5% बढ़ाई थी। इंग्लैंड यूरो जोन से बाहर है, वहां अक्टूबर में महंगाई 13% को पार कर जाने का अंदेशा है। आम लोगों और इंडस्ट्री को प्राकृतिक गैस की आसमान छूती कीमतों से बचाने के लिए इंग्लैंड ने दाम की ऊपरी सीमा तय कर रखी है।

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चीन और यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं अनुमान से ज्यादा तेजी से नीचे आ रही हैं

अक्टूबर में यह सीमा 70% बढ़ाए जाने की उम्मीद है। उसके बाद महंगाई भी सातवें आसमान पर होगी। कमोबेश यही स्थिति दूसरे यूरोपीय देशों की है। वैश्विक हालात को देखते हुए आईएमएफ ने कहा है कि अमेरिका, चीन और यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं अनुमान से ज्यादा तेजी से नीचे आ रही हैं, इसलिए पूरी दुनिया में जल्दी ही मंदी आ सकती है। यानी 3 सबसे बड़े आर्थिक ब्लॉक दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए अस्थिरता पैदा कर रहे हैं। आईएमएफ ने जुलाई में 2022 के लिए ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान 0.4% घटाकर 3.2% और 2023 के लिए 0.7% घटाकर 2.9% कर दिया था। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सर्वे में शामिल अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 2022 के बाकी दिनों और 2023 में ग्रोथ रेट कम रहेगी, महंगाई ऊंची बनी रहेगी और इस वजह से रियल वेज घटते रहेंगे। रियल वेज का मतलब है महंगाई को समायोजित करने के बाद की आमदनी।

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