Wednesday, December 6, 2023
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चने की ये टॉप उन्नत किस्मे तोड़ेंगी सारे रिकॉर्ड, प्रति हेक्टेयर होगा 30 क्विंटल तक उत्पादन, देखे पूरी जानकारी

चने की ये टॉप उन्नत किस्मे तोड़ेंगी सारे रिकॉर्ड, प्रति हेक्टेयर होगा 30 क्विंटल तक उत्पादन, देखे पूरी जानकारी जैसा कि आप सभी जानते हैं अभी नई तकनीक से खेती करने का रिवाज चल रहा हैं। जिसके कारण कई आज के समय की खेती में आपको पूरी तरह बदलाव देखने मिलता है.कुछ समय बाद खरीफ फसलों की कटाई शुरू हो जाएगी और किसान रबी सीजन में गेहूं की फसल की बुआई के लिए चने की अधिक उपज देने वाली किस्मों की तलाश कर रहे हैं। चने की खेती रबी सीजन की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है। बाजार में इसकी मांग काफी रहती है ऐसे में आज हम आपके लिए चने की कुछ खास बंपर पैदावार देने वाली किस्मों की जानकारी लेकर आए हैं। चलिए जानते है इसके बारे में पूरी डिटेल्स।

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काक 2 चना किस्म (Kak 2 gram variety)

आपकी जानकारी के लिए बता दे की चने की इस किस्म को मध्यम समय में अधिक पैदावार देने के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे रोपण के लगभग 110 से 130 दिनों बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं। औसत उपज 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। काबुली चना की यह किस्म बरनी भूमि को छोड़कर लगभग सभी प्रकार की भूमि में उगाई जा सकती है। इसके पौधे अधिक शाखाओं के साथ फैले हुए हैं। इसका रंग सफेद और गुलाबी-भूरा होता है।

जाकी 9218 चना किस्म (Jaki 9218 gram variety)

आपकी जानकारी के लिए बतादे चने की यह किस्म एक मध्यम समय में उपज देने वाली वैरायटी है। यह किस्म के लगभग 110 से 115 दिन में तैयार हो जाती हैं। चने की इस किस्म की खेती सिंचित और असिंचित दोनों स्थानों पर कर सकते है। इसके पौधों का फैलाव भी कम होता है। जाकी चना किस्म का प्रति हेक्टेयर औसतन उत्पादन 20 क्विंटल के लगभग हो सकता है। जाकी चना किस्म का मध्य प्रदेश राज्य में अधिक उत्पादन किया जाता है।

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श्वेता चना किस्म (Shweta Gram variety)

आपको बतादे काबुली चने की ये किस्में अधिक उत्पादन के लिए जानी जाती हैं. जिसे ICCV 2 के नाम से भी जाना जाता है। इसके मध्यम मोटाई के दाने आकर्षक लगते हैं। बीज रोपण के लगभग 85 से 90 दिन बाद पक जाते हैं। इस किस्म के पौधों का प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 15 से 20 क्विंटल के बीच पाया जाता है. चने की इस किस्म को सिंचित और असिंचित दोनों ही जगहों पर आसानी से उगाया जा सकता है। काबुली चने में प्रोटीन की मात्रा काले चने से थोड़ी कम होती है. काले चने में आयरन, फ़ॉलेट और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा भी ज़्यादा होती है. काले चने की तुलना में काबुली चने में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट कम होता है

हरियाणा काबुली न. 1 चना किस्म (Haryana Kabuli No. 1 gram variety)

चने की इस विदेशी किस्म के पौधों की ऊंचाई सामान्य पौधों की तुलना में अधिक होती है. इस किस्म के पौधों को असिंचित भूमि में अधिक पैदावार देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके पौधे रोपण के लगभग 90 से 100 दिन बाद पक जाते हैं. इसके दाने आकार में मोटे दिखाई देते हैं. जिसका रंग गाढ़ा सफेद और चमकदार पाया जाता है. जो देखने में बेहद आकर्षक लगते हैं. इसके अनाज का बाजार भाव काफी अच्छा मिलता है. इसके पौधों का प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 25 से 35 क्विंटल के बीच पाया जाता है. लेकिन अगर फसल की देखभाल ठीक से की जाए तो प्रति हेक्टेयर पौधों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. इसके पौधों पर कीट रोगों का प्रभाव बहुत कम होता है.

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