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Monday, February 6, 2023
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किसी को चेक देने से पहले जान ले Cheque Bounce होने के नए Rule, वर्ना 2 साल सजा के साथ देना पड़ सकता है जुर्माना

Cheque Bounce Rule: किसी को चेक देने से पहले जान ले Cheque Bounce होने के नए Rule, वर्ना 2 साल सजा के साथ देना पड़ सकता है जुर्माना, चेक बाउंस होने को एक दंडनीय अपराध माना जाता है. और ऐसा होने पर जुर्माना, और 2 साल की सजा दोनों का प्रावधान है. इसके खिलाफ धारा 138 के तहत केस दर्ज किया जाता है.

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Cheque Bounce Rule

बैंक द्वारा लागू किये गए चेक बाउंस के नए रूल जान ले जिसे आपको भविष्य में होने वाली बड़ी घटना ने बच सके, अगर आप भी चेक से पेमेंट करते हैं तो कई बातों का ध्यान रखना काफी जरूरी है. नहीं तो चेक बाउंस होने पर आपको जुर्माने के साथ-साथ जेल भी जाना पड़ सकता है. Cheque Bounce को कोर्ट की भाषा में कानूनी अपराध माना जाता है. इसमें नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट 1881 (Negotiable Instruments Act of 1881) के तहत सजा का प्रावधान किया गया है. जिसमे चेक जिसका होता है उसको चेक में लिखी राशि के अनुशार जुर्माना लगता है और साथ ही साथ 2 साल की सजा दी जाती है बिना पैरोल के अनुसार और पढ़े |

जाने आपके द्वारा दिया गया चेक कब बाउंस होता है (Know when the check given by you bounces)

जाने आपके द्वारा दिया गया चेक बैंक द्वारा कब बाऊंस होता है जिससे आपको सजा के साथ जुर्मना लगता है, जब कोई बैंक किसी कारण से चेक को रिजेक्ट कर देता है और पेमेंट नहीं हो पाता है तो इसे चेक बाउंस होना कहते हैं. ऐसा होने का कारण ज्यादातर अकाउंट में बैलेंस ना होना होता है. इसके अलावा अगर व्यक्ति के सिग्नेचर में अंतर है तो भी बैंक चेक को रिजेक्ट कर देता है. और रिजेक्ट चेक को बैंक द्वारा बाउंस की श्रेणी में रखा जाता है |

जाने चेक बाउंस होने के कारण (due to check bounce)

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उपभोकता द्वारा दिए जाने वाला चेक बैंक कई कारणों से रिजेक्ट कर देती है जिस चेक बाउंस कहते है चेक बाउंस होने के कुछ मुख्य कारण यहाँ है –

  • भुगतानकर्ता के बैंक अकाउंट में पर्याप्त पैसों का न होना
  • हस्ताक्षर एक समान न होना
  • अकाउंट नंबर का एक समान न होना
  • चेक की तारीख के साथ जारी करें
  • शब्दों और संख्याओं में राशि का एक समान न होना
  • फटा-कटा चेक
  • ओवरड्राफ्ट की लिमिट को पार करना

जाने बैंक द्वारा चेक बाउंस होने के बाद क्या होता है (Know what happens after the check bounced by the bank)

जाने बैंक द्वारा भुगतान चेक कब बाउंस होता है भारत में चेक बाउंस होने को एक अपराध माना जाता है. चेक बाउंस नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 के मुताबिक चेक बाउंस होने की स्थिति में व्‍यक्ति पर मुकदमा चलाया जा सकता है. उसे 2 साल तक की जेल या चेक में भरी राशि का दोगुना जुर्माना या दोनों लगाया जा सकता है चेक बाउंस होने पर चेक देने वाले व्यक्ति को इसकी जानकारी देना होती है. जिसके बाद उसे 1 महीने के भीतर आपको पेमेंट करना होता है. ऐसा ना करने की स्थिति में व्यक्ति को लीगल नोटिस भेजा जाता है. उसके बाद भी अगर 15 दिन तक कोई जवाब नहीं दिया जाता है तो उसके खिलाफ Negotiable Instrument Act 1881 के सेक्शन 138 के तहत केस रजिस्टर होता है. नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 के तहत व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जा सकता है और चेक जारीकर्ता को दो साल तक की सजा हो सकती है.

लिखी हुई तारीख के बाद चेक कब तक वैलिड रहता है (How long is a check valid after the date it is written)

पोस्ट डेटेड चेक, सामान्य चेक की तरह, जारी होने की तारीख से 3 महीने की वैधता रखते हैं। भारतीय राष्ट्रीय बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (भारतीय रिजर्व बैंक) ने 1 अप्रैल 2012 से सभी चेकों की वैधता अवधि पिछले 6 महीनों से घटाकर 3 महीने कर दी है, मतलब चेक, बैंक ड्राफ्ट वर्तमान में इनके जारी होने से 3 महीने के लिए वैलिड होते हैं.

जाने चेक की वैधता अवधि क्या है ? (Know what is the validity period of the cheque?)

बैंक चेक उस पर डाली गई डेट यानी तारीख के बाद 3 महीने तक ही वैलिड रहता है। यानी इसे इसी अवधि में डिपॉजिट या विदड्रॉ करना होता है। इस अवधि के बाद चेक का इस्तेमाल करने पर चेक आपके काम नहीं आएगा और आपको नुकसान झेलना पड़ेगा। 3 महीने से अधिक पुराने चेक को अस्वीकार करना आम बैंकिंग प्रथा है. यह प्रथा उस व्यक्ति की सुरक्षा के लिए है जिसने चेक लिखा है, क्योंकि संभावना है कि भुगतान किसी अन्य माध्यम से किया गया होगा या चेक खो गया होगा या चोरी हो गया होगा.

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किसी को चेक देने से पहले यह जान ले ? (Know this before giving a check to someone?)

  • अगर आप जब भी किसी को चेक दें तो ये पूरी तरह सुनिश्चित करें कि आपके खाते में पैसे हैं.
  • इसके अलावा चेक लेने वाले व्यक्ति को इसके तीन महीने के अंदर ही कैश करा लेना चाहिए.
  • जब भी किसी को चेक से पेमेंट करें तो नाम और धनराशि को लेकर शब्‍दों व फिगर्स के बीच ज्यादा स्पेस देने से बचें.
  • जब भी बैंक चेक पर सिग्नेचर (Signature) करें तो याद रखें कि आपको वैसे ही साइन करने हैं, जैसे संबंधित बैंक ब्रांच के रिकॉर्ड में पहले से दर्ज हैं.
  • जब भी किसी को बैंक चेक से पेमेंट करें तो उसे चेक की डिटेल जैसे चेक नंबर, अकाउंट का नाम, अमाउंट और डेट जरूर नोट कर लें.
  • हमेशा अकाउंट payee चेक जारी करें.
  • चेक पर किए गए सिग्नेचर बैंक में रजिस्टर होना चाहिए.
  • चेक पर जानकारी सावधानीपूर्वक सही भरें.
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