जीरे की खेती किसानो को बना देंगी मालामाल, कम लागत में मुनाफा भी होगा डबल, देखे पूरी जानकारी

By Jitendra

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जीरे की खेती किसानो को बना देंगी मालामाल, कम लागत में मुनाफा भी होगा डबल, देखे पूरी जानकारी

जीरे की खेती किसानो को बना देंगी मालामाल, कम लागत में मुनाफा भी होगा डबल, देखे पूरी जानकारी, आज हम बात करेंगे जीरे के खेती के बारे में की जीरे की खेती कर किसान कैसे लाखो में कमा सकते है सही मायनों में भारतीय व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने में मसालों का अहम योगदान होता है. इन्हीं मसालों में शामिल है जीरा जिसका तड़का लगने पर भारतीय व्यंजनों का स्वाद बढ़ जाता है. भारत और विदेशों में जीरा का काफी प्रयोग किया जाता है, जिसके चलते किसानों के लिये जीरा की खेती फायदे का सौदा साबित हो सकती है. बता दें कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी जीरा की काफी डिमांड रहती है, इसलिये किसान चाहे तो इस सर्दी के सीजन में जीरा की खेती करके अच्छी आमदनी है आइये जानते है जीरे कि खेती के बारे में पूरी जानकारी।

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जीरे की खेती करने का आसान तरीका

पारंपरिक फसलों के मुकाबले जीरा की दोहरी फसल ज्यादा मुनाफा देती है। सही मौसम, उपयुक्त मिट्टी, उन्नत किस्म के बीज और खाद-उर्वरक के साथ-साथ सही सिंचाई व्यवस्था के जरिये साथ जीरा उगाकर बिना नुकसान के अच्छी आमदनी ले सकते हैं। वैसे तो जीरा की खेती ज्यादा ठंडे और शुष्क इलाकों में की जाती है, लेकिन भारत में गुजरात और राजस्थान जैसे गर्म इलाकों को जीरा उत्पादन में अग्रणी का दर्जा प्राप्त है। भारत में करीब 80 प्रतिशत जीरा उत्पादन गुजरात और राजस्थान में किया जाता है. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में भी विश्व प्रसिद्ध काला जीरा की खेती करके किसान काफी अच्छा लाभ ले रहे हैं।

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जानिए जीरे की खेती के लिए कैसी होनी चाहिए जलवायु

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ज्यादा गर्म, ज्यादा नमी और बारिश वाले स्थानों पर जीरा की खेती करना बड़ी मुसीबत का काम है. इसकी खेती के लिए गर्म, सामान्य और सर्द-शुष्क तापमान सबसे बेहतर रहता है, इसलिये हिमाचल प्रदेश के सर्द तापमान में काला जीरा उगाया जाता है, जहां इसके पौधे ठंडे वातावरण में तेजी से विकास करते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो एक बार जीरा की लगाने के बाद 3 से 4 साल के अंतराल पर ही दोबारा जीरा की खेती करनी चाहिये. किसान चाहें तो जैविक विधि से इसकी व्यावसायिक खेती कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि जीरा की उन्नत किस्मों का चयन किया जाए. इसकी बुवाई के लिए नवंबर और दिसंबर का महीना सबसे उपयुक्त रहता है.

जीरा एक कम पानी वाली फसल है

बता दें कि जीरा की खेती के लिये 12 से 16 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त रहते हैं। जीरा एक कम पानी वाली फसल है, जिसकी खेती के लिए अधिक सिंचाई की जरूरत नहीं होती, लेकिन जीरा के पौधों की रोपाई या बीजों की बुवाई के बाद हल्की सिंचाई का काम किया जाता है. इस फसल में दूसरी सिंचाई 7 से 10 दिनों अंतराल पर की जाती है.

जीरे की खेती में कितनी लगेंगी लागत और कितना कमा सकते मुनाफा

जीरे की खेती करने के लिए लागत कितनी लगती है और उससे प्रॉफिट कितना मिलता है इस बारे में पूरी जानकारी देखेंगे आज हम इस टॉपिक मे जीरा एक दोहरे उत्पादन वाली फसल है, जिसे मसाले के अलावा और औषधी के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. प्रति हेक्टेयर खेत में जीरा की फसल लगाकर 80 से 90 हजार रुपये कमाए जा सकते हैं. इसकी खेती के लिए 30 से 35 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की शुरुआती लागत आती है, जिसे बाजार में 200 रुपये किलो के भाव पर बेचा जाता है. एक अनुमान के मुताबिक करीब 5 हेक्टेयर खेत में जीरा की खेती करके 4 से 5 लाख तक की आमदनी ले सकते हैं.

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