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Monday, February 6, 2023
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Kali Haldi Ki Kheti: काली हल्दी की खेती से करे शानदार कमाई, ले कम लगत में अधिक मुनाफा, जाने कैसे करे काली हल्दी की खेती

Kali Haldi Ki Kheti: काली हल्दी की खेती से करे शानदार कमाई, ले कम लगत में अधिक मुनाफा, जाने कैसे करे काली हल्दी की खेतीआजकल लोग खेती की ओर तेजी से मुड़ रहे हैं। ऐसे में आप भी खेती के जरिए शानदार कमाई कर सकते हैं। आज हम आपको एक ऐसे प्रोडक्ट के बारे में बताएंगे जिससे आपकी किस्मत के दरवाजे खुल जाएंगे।

काली हल्दी की खेती करके करे शानदार कमाई, ले कम लगत में अधिक मुनाफा, जाने कैसे करे काली हल्दी की खेती

यह ऐसा बिजनेस जिसे शुरू करके आप बहुत जल्द मालामाल हो सकते हैं। आपको बता दें काली हल्दी सबसे ज्यादा महंगा बिकने वाले प्रोडक्ट्स में शामिल है। बहुत सारे औषधीय गुण होने के चलते काली हल्दी की कीमत मार्केट में बहुत अधिक होती है। काली हल्दी की खेती से आप मोटा मुनाफा कमा सकते हैं। काली हल्दी के पौधे की पत्तियों में बीच में एक काली धारी होती है। इसका कंद अंदर से कालापन लिए हुए या बैंगनी रंग का होता है। आज हम यहां जानेंगे कि काली हल्दी की खेती कैसे की जाती है और इससे कैसे मुनाफा कमाया जा सकता है

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कैसे की जाती है इसकी खेती (how it is cultivated)

काली हल्दी की खेती के लिए भुरभुरी दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है. इसकी खेती करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि खेत में बारिश का पानी ना रुके। एक हेक्टेयर में काली हल्दी के करीब 2 क्विंटल बीज लग जाते हैं. इसकी खेती के लिए जून का महीना बेहतर माना जाता है। इसकी फसल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं रहती है। इतना ही नहीं इसमें किसी भी प्रकार के कीटनाशक की भी जरूरत नहीं पड़ती है। इसकी वजह ये है कि इसके औषधीय गुणों के कारण इसमें कीट नहीं लगते हैं। हालांकि अच्छी पैदावार के लिए खेती से पहले ही अच्छी मात्रा में गोबर की खाद डालने से हल्दी की पैदावार अच्छी होती है सम्पूर्ण विवरण यहाँ पढ़े ..

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उपयुक्त जलवायु (suitable climate)

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काली हल्दी की खेती उष्ण और समषीतोष्ण जलवायु में की जाती है, लेकिन यह खुली धूप में भी अच्छी उगता है. इसके साथ ही खेती की परिस्थितियों के अनुसार अच्छा उगता है. यह पौधा लगभग 41 से 45 डिग्री सेंटीग्रेड तक तापमान सहन कर सकता है.

उपयुक्त मिट्टी (suitable soil)

काली हल्दी रेतीली-चिकनी और अम्लीय मिट्टी में अच्छी उगती हैं. इसके अलावा बलुई मिट्टी भी उपयुक्त मानी जाती है. बता दें कि चिकनी काली मुरूम मिश्रित मिट्टी में कंद बढ़ते नहीं हैं.

भूमि की तैयारी (land preparation)

सबसे पहली जुताई गहरा हल चलाकर करनी चाहिए. इसके बाद बारिश के पहले या जून के पहले सप्ताह में 2 से 3 बार जुताई करके मिट्टी भुरभुरी बना लें. ध्यान रखें की खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए. इसके बाद खेत में 10 से 15 टन प्रति हेक्येटर की दर से गोबर की खाद मिलाएं.

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प्रजनन सामग्री (breeding material)

सबसे खास बात यह है कि इसकी गांठें ही इसकी प्रजनक सामग्री हैं. बुवाई से पहले पकी हुई गाठों को एकत्र किया जाता है फिर लंबाई में काटा जाता है. इसके बाद हर भाग में एक अंकुरण कली होती है जो रोपण के लिए उपयोगी है.

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बुवाई का तरीका (sowing method)

काली हल्दी की बुवाई के लिए गांठ को सीधे ही बो दिया जाता है. आपको बता दें कि एक हेक्टेयर जमीन में लगभग 2.2 टन गांठों की आवश्यक होती है.

उपचार (remedy)

बुवाई से पहले हल्दी की गांठों को बाविस्टीन के 2 प्रतिशत घोल में लगभग 20 मिनट तक डुबोकर रखना चाहिए.

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प्रत्यारोपण (transplant)

मानसून आने से पहले गांठ को जमीन में दबाकर उगा दें. ध्यान दें कि पौधे को 30 X 30 सेंटीमीटर के अंतर में लगाना है, क्योंकि गांठे लगभग 15 से 20 दिनों के अंदर अंकुरित हो जाती हैं. इसके अलावा खेत में जुताई के समय लगभग 10 से 15 कार्बनिक खाद मिलाएं.

रोपण की विधियां (planting methods)

पौधों के आसपास पादप-रोपण के लगभग 60 दिन बाद कुछ मिट्टी चढ़ाई जाती है. इसके साथ ही पौधे की शुरुआती वृद्धि के बीच-बीच में हाथ से खरपतवार हटाना ज़रूरी है. बता दें कि आप इस प्रक्रिया को 60, 90 और 120 दिन के बाद कर सकते हैं.

सिंचाई प्रबंधन (irrigation management)

यह फसल आमतौर पर खरीफ सीजन में वर्षायुक्त हालात में उगाई जाती है. यदि वर्षा न हो तो सिंचाई आवश्यकतानुसार की जानी चाहिए.

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रोग और कीट (diseases and pests)

वैसे तो अभी तक काली हल्दी की फसल पर कीटों का प्रकोप नहीं देखा गया है, लेकिन कभी-कभी फसल के पत्तों पर धब्बे पड़ जाते हैं. इसकी रोकथाम के लिए पत्तों पर बॉरडाक्स का मिश्रण मासिक अंतराल पर छिड़क दें.

फसल कटाई (Harvesting)

काली हल्दी की फसल कटाई का काम जनवरी के मध्य में किया जाता है. ध्यान रहे कि फसल से जड़ें निकालते समय गांठों को ठीक से निकाला जाना चाहिए, क्योंकि अगर वह खराब होते हैं तो कंदों को नुकसान पहुंचता है.

कटाई के बाद का प्रबंधन (post harvest management)

  • सबसे पहले गांठे निकालने के बाद उनका छिलका उतार लें.
  • फिर छाया और खुली हवा में सूखा लें.
  • इसके बाद सूखी गांठों को उपयुक्त नमी रहित कन्टेनरों में रख दें.

पैदावार और लाभ (yield and profit)

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उपरोक्त तकनीक से काली हल्दी की खेती की जाए, तो एक एकड़ में ताजी गांठों की लगभग 50 टन पैदावार प्राप्त की जा सकती है, जबकि सूखी गांठों की लगभग 10 टन पैदावार मिल सकती है. इस हिसाब से अगर कच्ची हल्दी का दाम अगर 30 रुपए प्रति किलो हो तो 10 लाख की कमाई बड़े आराम से की जा सकती है.

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