केंद्रीय सहकारिता मंत्री का बड़ा ऐलान, दिसंबर 2027 के बाद एक किलो भी दाल आयात नहीं करेगा भारत

By Pragya

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केंद्रीय सहकारिता मंत्री का बढ़ा एलान, दिसंबर 2027 के बाद एक किलो भी दाल आयात नहीं करेगा भारत

केंद्रीय सहकारिता मंत्री का बढ़ा एलान, दिसंबर 2027 के बाद एक किलो भी दाल आयात नहीं करेगा भारत केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को किसानों से सीधा अरहर दाल खरीद के लिए एक ई-पोर्टल जारी किया है। इस पोर्टल के जरिये किसानों से मार्केट रेट से अधिक दाम पर अरहर दाल को ख़ातिदा जायेगा। इस पोर्टल के माध्यम से सरकारी एजेंसियां जैसे कि नेफेड और एनसीसीएफ किसानों से अरहर को खरीदेंगे। यह काम पूरी तरह से सहकारिता के स्तर पर किया जायेगा। इससे बाजार में अरहर की कीमतें नियंत्रित रखने में भी बहुत ज्यादा मदद मिलेगी।

सहकारिता मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसियां नेफेड और एनसीसीएफ डायनेमिक प्राइसिंग फॉर्मूले के तहत किसानों से अरहर दाल की खरीदा जायेगा। डायनेमिक फॉर्मूले का मतलब। कि जब मार्केट में अरहर के दाम बढ़ेंगे तो किसानों से भी अधिक दाम पर दाल की खरीद लिया जायेगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने में काफी ज्यादा सहायता मिलेगी।ऐलान

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ई-पोर्टल लॉन्च के मौके पर अमित शाह ने कहा कि NAFED (National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India) और NCCF (National Cooperative Consumers’ Federation of India) द्वारा विकसित वेब पोर्टल का शुभ आरंभ किया जा रहा है। जिससे अरहर की दाल की खेती करने वाले किसान अपनी दाल को ऑनलाइन बेच कर सीधे पैसे अपने अकाउंट में पा सकते है।

पोर्टल से कैसे होगा फायदा

सरकार का कहना है कि पोर्टल की मदद से किसान सीधा सरकारी एजेंसियों को अरहर दाल को बेच सकता है। उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए बिचौलियों या व्यापारियों के शेयर की कोई मदद नहीं चाहिए। दाल की खरीद होते ही नेफेड और एनसीसीएफ किसानों के खाते में ऑनलाइन पैसे जमा कर सकते है।

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इस पोर्टल के जरिये किसान आपकी आमदनी बढ़ाने की कोशिश कर रहे है। साथ ही सरकारी खरीद से अरहर दाल का बफर स्टॉक भी बढ़ेगा और इससे महंगाई को काबू करने में सहायता मिल सकती है। सरकार का कहना है कि किसानों से दाल की सीधी खरीद से बफर स्टॉक बढ़ेगा और इससे आयात की निर्भरता नहीं होगा। दालों के आयात की वजह से महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। और इससे देश के किसानों को भी घाटा सहना पढता है। सरकार को दालों का अधिक आयात करना होगा क्योंकि देश में पर्याप्त भंडार नहीं हो रहा है। पिछले साल की तुलना में इस साल 35 फीसदी अधिक दाल का आयात करने की सभावना बन सकती है।

अमित शाह का कहना

ई-पोर्टल लॉन्च के कार्यक्रम में देश भर के अरहर दाल के किसान, पैक्स के अध्यक्ष और एफपीओ पदाधिकारी भी रहेंगे। इस प्रोग्राम में अमित ने कहा, पोर्टल के माध्यम से एमएसपी से अधिक बाजार मूल्य के एवरेज पर आधारित, किसानों का एडवांस में रजिस्ट्रेशन करके अरहर दाल को खरीद सक्यते है। इसका पूरा पैसा किसानो को खाते में मिलेगा।

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आज के इस कदम से दलहन के क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता बढ़ जाएगी। फसलों के पैटर्न में बदलाव भी होंगे। शाह ने कहा, दालों का अधिक आयात करना पद्घता है। मूंग और चने में देश आत्मनिर्भर है, लेकिन बाकी दलहन इंपोर्ट करना होता है. लेकिन देश में जिस तरह की कृषि सुविधाएं उपलब्ध है। उसे देखते हुए दालों का आयात सम्मान की बात नहीं हो सकती है। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलहन किसानों पर एक जिम्मेदारी डाली है। कि 2027 तक भारत दाल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो।

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