Paralysis Patients: इस देवी मंदिर में ठीक होते है लकवा मरीज, मुर्गा छोड़ने की परम्परा कायम, जानिए क्या

By Saurabh

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Paralysis Patients: एक ऐसा मंदिर जहां सालो से लोग जो लकवा से ग्रस्त है ठीक होने के लिए आते है और मुर्गा मंदिर मे दान करते है यही नहीं बल्कि वो मरीज पहले की तरह ठीक हो कर जाते है.

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Paralysis Patients: इस देवी मंदिर में ठीक होते है लकवा मरीज, मुर्गा छोड़ने की परम्परा कायम, जानिए क्या चित्तौड़गढ़ मेवाड़ के इतिहास की शौर्य और त्याग की अद्भुत मिसाल और पन्नाधाय को सभी जानते है यह पन्नाधाय की जन्मस्थली भी है यह जगह एक और बात के लिए प्रसिद्ध है.यहां देवी माता का एक मंदिर लकवा मरीजों के लिए प्रसिद्ध है ऐसा कहा जाता हैं यहां आकर मरीजों का लकवा ठीक हो जाता है.

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इतिहासकारों के अनुसार, चित्तौड़गढ़ जिले के गांव माता जी की पांडोली में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है जो महाभारत काल के समय से है यह मंदिर जिला मुख्यालय से केवल 10 किलोमीटर दूर स्थित है देवी का शक्तिपीठ है यह मंदिर, इस शक्तिपीठ को झातला माता के नाम से जाना जाता है.पांडोली गांव के तालाब की पाल पर बना यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है.

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यहां के लोगो और लोक कथाओ के अनुसार यहां सैंकड़ो वर्षों पहले एक विशाल वट वृक्ष था. उसके नीचे देवी की प्रतिमा थी. इसलिए इसे वटयक्षीणी देवी का मंदिर भी कहते हैं. बाद में विक्रम संवत 1215 में इस स्थान पर एक विशाल मंदिर का निर्माण किया गया जो आज भी स्थित है. वर्तमान में इस मंदिर के गर्भ गृह में पांच देवियों की प्रतिमा हैं.

यह प्राचीन मंदिर लकवा मरीजों के बीच बहुत प्रसिद्ध है लोगों की आस्था का केंद्र भी है मान्यता है लकवा के जो मरीज चाहे कैसी भी हालत मे हो,कहीं भी इलाज से ठीक नहीं हो पा रहे वो भी यहां आकर ठीक हो जाते हैं इसके लिए लकवा मरीजों को मंदिर में रात में रुकना पड़ता है साथ ही मंदिर मे लगे वट वृक्ष की परिक्रमा करनी होती है फिर मंदिर में मुर्गा छोड़ना पड़ता है.

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इस मंदिर प्राचीन मंदिर में चैत्र नवरात्रि और अश्विन मास की नवरात्रि के समय विशाल मेला लगता है नवरात्रि के वक्त यहां पांच बार आरती होती है इस मंदिर की देखभाल गुर्जर समाज का एक परिवार लगभग 125 वर्ष से करता आ रहा है.

इतिहासकारों के अनुसार,पन्नाधाय का जन्म गुर्जर समाज के एक परिवार में हुआ था वो सभी इसी मंदिर की देखभाल कर थे और आज भी कर रहे है पन्नाधाय का विवाह राजसमंद जिले के कमेरी गांव, में सूरजमल गुर्जर से हुआ था. यह पन्नाधाय वही महान व्यक्ति थे जिन्होंने मेवाड़ के महाराणा उदय सिंह को बचाने के लिए अपने बेटे चंदन की बलि दे दी थी.

डिस्क्लेमर=हम किसी भी बात का समर्थन नहीं करते ,यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ मुद्दा है यह जानकारी पुजारी तथा गांव वालों से ली गई है

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