सोमवार 22 जनवरी को किस रंग के वस्त्र धारण करेंगे रामलला, जाने किसने तैयार किये रामलला के वस्त्र

By Pragya

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सोमवार 22 जनवरी को किस रंग के वस्त्र धारण करेंगे रामलला, जाने किसने तैयार किये रामलला के वस्त्र

जिस तरह मनुष्य का जन्म बड़े सौभाग्य के साथ होता है। उसी तरह भगवान की सेवा का अवसर भी भाग्यशाली व्यक्तियों को ही मिलता है। भगवान अपनी सेवा का अवसर देने में भक्त की श्रद्धा और भक्ति का ध्यान पूरी तरह से रखते है। इसी तरह श्रीराम अपने भक्त हनुमान की भक्ति में बधे हुए है। इसी सिलसिले में अब बात कलियुग के एक ऐसे ही भाग्यशाली परिवार की जो बीती चार पीढ़ियों से रामलला के वस्त्र तैयार करते आ रहे है। भगवान के इस दर्जी का नाम भगवत प्रसाद पहाड़ी है। जिनके घर पर बीते कुछ दिनों से सिलाई मशीनों के चलने की आवाज और अन्य खटर-पटर तेज हो रही है।

भगवान के दर्जी का परिवार जो चार पीढ़ियों से कर रहा है सेवा

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अयोध्या के वशिष्ठ कुंड के पास रामलला के दर्जी भगवत प्रसाद पहाड़ी रहते है। इनकी पुस्तैनी दुकान भी है। जिसका नाम श्री बाबूलाल टेलर्स के नाम से जाना जाता है। ये चौबंदी पोशाक बनाने के एक्सपर्ट हैं. जिनका पता – प्रमोदवन बड़ी कुटिया, अयोध्याजी (उत्तर प्रदेश) है. उनका परिवार चार पीढ़ियों से भगवान के वस्त्र को बना रहा है। रामलला की इस सेवा की शुरुआत भगवत के बाबा रामशरण के द्वारा की गयी थी। उनके साथ इस सेवा को उनके पिता बाबूलाल ने आगे बढ़ाया है। आज वो और उनके भाई और उनके तीने बेटे और बहुएं भी भगवान के वस्त्र सिलकर न सिर्फ रोजी-रोटी चला रहे हैं और अपने जीवन को धन्य मानते है।

सोमवार को 22 जनवरी को कैसे कपडे पहनेंगे रामलला

अयोध्या के राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा सोमवार दिनांक 22 जनवरी को होने जा रहा है। ऐसे में राम लला उस दिन कौन से वस्त्र पहनने वाले है। इस सवास का जवाब देते हुए भगवत ने कहा कि पुरानी परंपरा के हिसाब से उन्होंने भगवान के लिए सफेद रंग के कपड़े को तैयार किया है। लेकिन संभव है कि उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा की वजह से राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी सर्व सम्मति से रामलला को ‘पीतांबर’ पहनाना चाहें तो इसकी भी तयारी पूरी हो चुकी है।

भगत के वश में हैं भगवान

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‘भगत के वश में हैं भगवान’. कुछ इसी तर्ज पर भगवान अपने भक्त को जो कुछ भी देते है। उसे वो उन्हें प्रसाद बनाकर प्रभु को अर्पित कर देते है। भगवान का भोजन प्रसाद बनना हो या कोई और सेवा हर समय इस बात का ध्यान रखना जरुरी है। जैसे ठंड पड़ रही है तो जब भक्त ऊनी कपड़े पहन सकते है। तो सर्दी से बचाने के लिए मंदिरों में भी भगवान को मौसम के हिसाब से मखमल और ऊनी वस्त्र धारण कराए जायेगे।

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