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Sunday, January 29, 2023
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किसी भी व्यक्ति की मृत्यु हो जानें के बाद भोज करना चाहिए या नहीं, जानिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी से

Swami Avimukteshwarananda: शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारियों के नाम की घोषणा कर दी गई है। काशी के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिषपीठ बद्रीनाथ और स्वामी सदानंद को द्वारका शारदा पीठ का प्रमुख घोषित किया गया है। ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने के बाद उत्तराधिकारी तय हो गए हैं। स्वामी स्वरूपानंद  दो पीठों ज्योतिष पीठ और द्वारकाशारदा पीठ के शंकराचार्य थे। ज्यातिष पीठ बद्रीनाथ पर उनके शिष्य काशी के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नया शंकराचार्य घोषित किया गया है।

Swami Avimukteshwarananda

किसी भी व्यक्ति की मृत्यु हो जानें के बाद भोज करना चाहिए या नहीं जानिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी से, हिंदू धार्मिक परंपरा के अनुसार किसी भी व्यक्ति की मृत्यु हो जानें पर 13वें दिन भोज कराया जाता है, जिसमें सगे संबंधियों और मित्रों को भोजन कराया जाता है। मृत्यु के बाद भोज कराना उचित है या नहीं इस बारे में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक वीडियो में विस्तार से चर्चा की है।

उन्होंने मृत्यु के बाद कितने दिनों पर किसे भोजन कराना चाहिए। इस बारे में भी चर्चा की है। आइए जानते है उन्होंने इस बारे में क्या बताया है।

शास्त्रों में 12वें दिन पंडित भोजन की आज्ञा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि किसी भी मृत्यु के बाद तीन बार भोज कराया जाता है। पहली बार में महापात्र, दूसरी बार में पंडित और तीसरी बार में सगे संबंधियों को भोज कराया जाता है। 11वें दिन महापात्र को भोजन कराया जाता है और 12वें या 13वें दिन पंडित लोग भोजन करते हैं। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में 12वें दिन पंडित भोजन की आज्ञा दी गई है।

मृत्यु के बाद क्या कराना चाहिए 13वें दिन भोज

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आगे उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद 13वें दिन का भोज शास्त्र में अनुसार नहीं है। इस बारे में शास्त्र कुछ नहीं कहता है। शास्त्र में 12वें दिन 13 पंडित का ही भोज बताया गया है। 13वें दिन भोजना कराया लोकाचार्य है, रीति और रिवाज है। उन्होंने कहा कि रीति, रिवाज वह होता है, जिसका शास्त्रों में उल्लेख न हो।

13वें दिन भोज कराना लोकाचार्य

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि मृत्यु के बाद 13वें दिन भोज कराना लोकाचार्य है। अगर मृत्यु के बाद आपने 12वें दिन 13 पंडितों को अपने घर बुलाकर उनकी पूजा कर भोजन करा दिया, तो शास्त्र के अनुसार काम पूरा हो गया। 13वें दिन के काम या भोजन के बारे में शास्त्र कुछ नहीं कहता है। उन्होंने बताया कि हमारे यहां से एक कम हो गया है, इस बहाने हमारे यहां बहुत से लोग आएंगे और बढ़ोतरी होगी। इसी भावना से लोग 13वें दिन भोज कराते हैं, जबकि शास्त्र में इस बात का जिक्र नहीं किया गया है।

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