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Wednesday, February 8, 2023
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Wheat variety: गेहूं की यह वैरायटी तोड़ देगी कमाई के सारे रिकॉर्ड, 112 दिन में 75 क्विंटल की पैदावार, यहाँ जानिए

Wheat variety: गेहूं की यह वैरायटी तोड़ देगी कमाई के सारे रिकॉर्ड, 112 दिन में 75 क्विंटल की पैदावार, यहाँ जानिए, रबी सीजन की फसलों का जिक्र करें तो यहां प्रमुख नकदी फसलों में गेहूं की गिनती सबसे ऊपर होती है.

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Wheat Most PowerFull variety

गेहूं की गिनती प्रमुख खाद्यान्न फसलों में तो होती ही है साथ ही, देश में इसका उत्पादन और खपत बहुत अधिक मात्रा में होता है. भारतीय गेहूं देश के साथ-साथ दुनिया के बहुत से देशों में निर्यात की जाती है. ऐसे में किसानों की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह अच्छी गुणवत्ता वाला अनाज उगाएं.

जानिए पूसा तेजस गेहूं के बारे में (Know About Pusa Tejas Wheat)

हमारे देश के कृषि वैज्ञानिकों ने गेहूं की कई ऐसी किस्में विकसित की है जो कम समय और कम खर्च में अच्छी गुणवत्ता के साथ बंपर पैदावार भी देती है. इन किस्मों में पूसा तेजस गेहूं शामिल है, जिसे साल 2016 में इंदौर कृषि अनुसंधान केन्द्र ने विकसित किया था. पैदावार के मामले में यह किस्म किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है.

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Pusa Tejas Wheat

  • इस किस्म का वैज्ञानिक नाम HI-8759 है जो रोटी और बेकरी उत्पादों के साथ-साथ नूडल, पास्ता और मैक्रोनी जैसे उत्पादों को बनाने के लिये सर्वोत्तम मानी जाती है.
  • गेहूं की ये उन्नत किस्म आयरन, प्रोटीन, विटामिन-ए और जिंक जैसे पोषक तत्वों का खजाना है. वहीं, इस किस्म में गेरुआ रोग, करनाल बंट रोग और गिरने की संभावना भी नहीं रहती.

बुआई का समय देखे

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पूसा तेजस गेहूं की बुवाई के लिये 10 नवंबर से लेकर 25 नवंबर तक का समय सबसे उपयुक्त माना गया है. इस दौरान प्रति एकड़ के लिये 50 से 55 किलोग्राम बीज, प्रति हेक्टेयर के लिये 120 से 125 किलोग्राम बीज और प्रति बीघा के हिसाब से 20 से 25 किलोग्राम बीजदर का प्रयोग करना चाहिए.

देखे किस तरह से करना है खेती

  • इस किस्म की बुआई करने से पहले खेत को गहरा जोत कर मिट्टी को भुरभुरा बना लें. इसके बाद गोबर की खाद और खरपतवार नियंत्रण दवाओं का मिट्टी में छिड़काव करें ताकि फसल में खरपतवार उगने की संभावना ना के बराबर हो. इस किस्म की बुआई से पहले बीजों का अच्छी तरह से उपचार कर लें. इसके लिये कार्बोक्सिन 75 प्रतिशत या कार्बनडाजिम 50 प्रतिशत 2.5-3.0 ग्राम दवा से प्रति किलोग्राम बीजों का उपचार करना चाहिए.
  • सीड ड्रिल मशीन से बुआई करते हुए लाइनों के बीच 18 से 20 सेमी और 5 सेमी गहराई में बीजों की बुवाई करनी चाहिए.
  • यदि खेत या फसल में कभी कण्डवा रोग का इतिहास रहा हो तब भी बीजो को 1 ग्राम टेबुकोनाजोल या पीएसबी कल्चर 5 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार कर लेना चाहिए.

उत्पादन के बारे में जानिए

गेहूं की इस किस्म से किसान 115 से 125 दिनों के अंदर 65 से 75 क्विंटल तक पैदावार लें सकतें हैं. कड़क और चमकदार दानों वाली पूजा तेजस किस्म दिखने में जितनी आकर्षक होती है, इससे बने खाद्य पदार्थ भी उतने ही स्वादिष्ट होते हैं.

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